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अपनी सैलरी बचाकर इन्होने खड़े किये गरीब बच्चो के लिए तीन स्कूल, पढ़िए दिनेश की अनोखी कहानी

alarm_on 2017-01-05 19:43:24
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 कई लोग आभाव में जीवन जी कर बड़े होते है लेकिन कुछ लोग दुसरो के जीवन को सुधारने का प्रण ले लेते है.

हरियाणा के झज्झर जिले के गुल्बानी गाँव में पैदा हुए  दिनेश कुमार गौतम ने अपने परिवार को असुविधाओ के बीच झुझते हुए देखा था, कुछ समय बाद उनकी स्थिति में सुधर हुआ, लेकिन गौतम अपने कठिन वक़्त को भूले नहीं थे. उन्होंने उसी वक़्त तय कर लिया था की बचपन में पढने के लिए जो तकलीफ उन्हें झेलनी पड़ी वो दुसरे बच्चो को नहीं झेलनी पड़ेगी.

दिनेश ने पत्रकारिता में डिप्लोमा हासिल किया और राजस्थान आकर एक अखबार में काम करने लगे. इसी दौरान 1998 में दिनेश ने न्यू दिल्ली एजुकेशन सोसाइटी के नाम से राजस्थान में मुफ्त माध्यमिक विद्यालय की स्थापना की. लोग उन्हें दिल्ली वाला कहते थे और इसीलिए उन्होंने दिल्ली के नाम पर ही स्कूल का नाम रखा.



दिनेश को खुद की सैलरी के अलावा लोगों से भी मदद मिली. स्कूल के बेंच, परदे, अलमारिया और कंप्यूटर भी दुसरो द्वारा दिए गए है. एक बार दिनेश ने अपनी पूरी सैलरी स्कूल के बच्चो के लिए बस खरीदने में लगा दी जिसे वे खुद चलाकर बच्चो को स्कूल लाते थे.

रूकावटो से नहीं मानी हार

2003 तक दिनेश के स्कूल में बच्चो की संख्या 187 हो गयी थी. इस समय तक वे लगातार अपने काम और स्कूल के बीच सामंजस्य बिठाये हुए थे. धीरे धीरे कई लोगों ने उनसे मदद करने के लिए हाथ बढ़ाये और टीचर के रूप में सेवाए दी. राज्य सरकार ने भी उनके काम को देखकर स्कूल को मान्यता दे दी लेकिन अचानक 2003 में दिनेश को पारिवारिक कारणों से अहमदाबाद में शिफ्ट होना पड़ा और स्कूल बंद हो गया.



2005 में दिनेश दिल्ली शिफ्ट हुए और उन्होंने अपने सपने को पूरा करने का फैसला कर लिया. वे हर दिन काम के बाद समय निकालकर बच्चो को पढ़ाने लगे. इस बीच उन्होंने अपने सपने को साकार करने के लिए दृष्टि फाउंडेशन बनाया जिसका नाम उनकी बेटी के नाम पर था.

आज दृष्टि फाउंडेशन के अहमदाबाद में 2 और दिल्ली में 1 स्कूल है जो सरकारी स्कूल में पढ़ रहे बच्चो को उनके स्कूल के बाद उनकी पढाई में मदद करते है.

इन स्कूलो के लिए जगह भी लोगो ने बिना किसी किराये के स्वेच्छा से दी है. इन सभी स्कूलो में वालंटियर्स बारी बारी अपना वक़्त देकर बच्चो को पढ़ाते है. इसके अलावा यहाँ बच्चो को कत्थक भी सिखाया जाता है.



दृष्टि के अंतर्गत पांच राज्यों में डेंटल कैंप भी लगया जाता है जिसमे दिल्ली, उत्तराखंड, गुजरात, राजस्थान और हरियाणा शामिल है. इसके अलावा फाउंडेशन द्वारा दिल्ली में एक क्लिनिक भी शुरू किया गया है जिसमे अलग अलग डॉक्टर्स मुफ्त में अपनी सेवाए देते है.

दिनेश कहते है की ये सोचना की हर कोई केवल फायदे के लिए मदद करता है गलत है, कुछ लोग बिना स्वार्थ के भी मदद करते है. आज दृष्टि में 1000 से ज्यादा वालंटियर्स अपनी सेवाए दे रहे है. दिनेश कहते है की उनके परिवार ने जो तकलीफे देखी वो हर दिन दिनेश को अपना काम आगे बढाने के लिए प्रेरणा देती है.

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