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व्हाट्सएप ग्रुप में आपत्तिजनक पोस्ट के लिए एडमिन जिम्मेदार नहीं: HC

alarm_on 2016-12-24 14:42:10
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व्हाट्सएप ऑनलाइन चैट ग्रुप पर बोलने की आजादी को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में साफ कर दिया है कि व्हाट्सएप और उसके जैसी दूसरी सोशल नेटवर्किंग सर्विसेज के चैट ग्रुप एडमिन उसमें पोस्ट की जाने वाली सामग्री के लिए जिम्मेदार नहीं है. हाईकोर्ट ने एक चैट ग्रुप के प्रबंधक के खिलाफ दायर की गयी मानहानि याचिका को खारिज करते हुए ये आदेश सुनाया है.

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ग्रुप एडमिन दूसरे सदस्यों की पोस्ट पर लगाम नहीं लगा सकता. इस आधार पर ग्रुप के एडमिन पर किसी दूसरे सदस्य की ओर से भेजी गई आपत्तिजनक सामग्री की वजह से मानहानि का दावा नहीं किया जा सकता. हाईकोर्ट के जज ने कहा कि मैं ये समझने में असमर्थ हूं कि कैसे किसी ग्रुप के एडमिन पर उस ग्रुप में दूसरे सदस्यों की ओर से भेजी गई आपत्तिजनक सामग्री के लिए मानहानि का दावा किया जा सकता है. ये आरोप उसी तरह है जैसे न्यूजप्रिंट बनाने वाले को उसमें छापी गई टिप्पणी के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया जाए.

हाईकोर्ट का इस आदेश को सुनते हुए मानना था कि एडमिन से इजाजत लेकर कोई सामग्री पोस्ट नहीं की जाती, ग्रुप में कुछ भी पोस्ट होने से पहले एडमिन से उसकी इजाजत लेने का जब कोई प्रावधान ही नहीं है तो उसे दूसरे के पोस्ट के लिए ज़िम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है. एडमिन सिर्फ सदस्यों को सलाह दे सकता है कि वे ग्रुप में कोई भी आपत्तिजनक सामाग्री न डालें.

कोर्ट ने कहा कि एडमिन सिर्फ ग्रुप बनाता है और उसमें जोड़े जाने वाले सदस्यों का चयन करता है, जब कोई ग्रुप बनाया जाता है तो एडमिन कभी ये उम्मीद नहीं करता कि उसको किसी दूसरे सदस्य की वजह से दोषी साबित किया जाएगा.

इस मामले में एएन बिल्डवेल रियल स्टेट कंपनी के पूर्व निदेशक आशीष भल्ला ने मानहानि याचिका हाईकोर्ट मे दायर की थी, कंपनी के गुरुग्राम के एक हाउसिंग प्रोजेक्ट में तय अवधि में मकान न मिलने पर कुछ खरीदादरों ने एक ग्रुप बनाया था. आरोप था कि ग्रुप में प्रोजेक्ट के प्रबंधकों व निदेशकों के खिलाफ टिप्पणियां की गई. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि खरीददार अपने व्हाट्स एप ग्रुप में उनके लिए आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग कर रहें हैं, उन्हें जानवर के नाम से संबोधित किया जा रहा है. जिससे उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है. जबकि वह इस कंपनी को 2009 में ही छोड़ चुके हैं, ऐसे में खरीदारों की एसोसिएशन और चार खरीददारों, जो इस एसोसिएशन के सदस्य है, उन्हें पांच करोड़ रुपये मानहानि के रूप मे मुआवजा दिलवाया जाए.