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#Christmas : दुनिया के अलग अलग हिस्सो में किस तरह मनाया जाता है, यहाँ जानिए

alarm_on 2016-12-24 14:29:01
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क्रिसमस यीशु के जन्म का त्यौहार है । इसे दुनिया में कई तरीको से मनाया जाता है ।  आप जान के दांग रह जायेगे की हम जहाँ इसे प्रत्येक वर्ष 25 दिसम्बर को मनाते है  वहीँ कई जगहों पर इसे ६ जनवरी को भी  मनया जाता है । कहीं इसे ठण्ड का त्यौहार कहते और कहीं यह चिलचिलाती गर्मियों के बीच में आता है । आइये जानते है दुनिए के अलग अलग हिस्सो में क्रिसमस कैसे मनाया जाता है :-


बेथेलम

शुरू करते है बेल्थम से , यीशु का जन्म यहीं हुआ था  । एक और जहाँ रोमन कैथोलिक और प्रोटोस्टेंट इस पर्व को  25 दिसम्बर मानते है । ग्रीक, सीरियन और कट्टर ईसाई इसे 6 जनवरी को मानते है । वही कुछ अमेरिकन  इसे 18 जनवरी को भी मानते है । इस दिन सभी घरो के दरवाज़ों पे क्रॉस का निशान  रंगा जाता है और क्रिसमस की कहानियो का नाट्य रूपांतरण करते हुए बच्चे घर घर घूमते है।


 

ऑस्ट्रेलिया

एक और जहाँ दुनिया भर में क्रिसमस ठण्ड के मौसम में बर्फ के बीच मनाई जाती है, इस वक़्त  ऑस्ट्रेलिया में बहुत गर्मी होती है। पर यह ऑस्ट्रेलियाई लोगो को रोक नहीं  पाती है और बाकि का जलसा यहाँ लगभग सामान ही होता है।


 

चीन

वही चीन में बच्चे, क्रिसमस के पेड़ को तरह तरह के रंग बिरंगे फूलो, लड़ियो और कागज़ के बनी गहनों से सजाते है। यहाँ मोज़े को घर में लटकाने की भी प्रथा है। यहाँ  सांता को " ची लाउ रेन " या " क्रिसमस का बूढा आदमी" भी कहते है, इन मोजो में वही उपहार भरते है, ऐसा बच्चे मानते  है।


जापान

हालकि जापान में सिर्फ 1 प्रतिसत ईसाई है, पर  इनका जोश देखते  ही बनता है। यहाँ क्रिसमस घर और परिवार से ज्यादा, दुसरो की मदद में मनाया जाता है। लोग गरीब, बीमार और भूखो की सेवा में ये दिन बिताना पसंद करते है। दान पुण्य का यहाँ ज्यादा प्रचलन है। " होती ओशो " ( Hotei Osho ) , जो की बौद्ध भिक्षु  है, यहाँ सांता की तरह माने जाते है।


मिस्र 

यहाँ क्रिसमस 7 जनवरी को मनाई जाती है। यहाँ ईसाई समुदाय को कॉप्टिक क्रिस्चियन कहा जाता है। ये 40 दिनों का उपवास रखते है। इस अवधि में वह मुर्गा, मांस और दूध से बनी चीज़े नहीं खाते है। 40 वे दिन पे सभी चर्च में मिलते है और प्रार्थना के बाद घर पर कई व्यंजनों का लुफ्त उठाते है। इसमे मुख्य पकवान   " फातआ " कहते है । इसेके साथ शरबत भी परोसा जाता है ।


रूस

  यहाँ क्रिसमस को " ठण्ड का त्यौहार" कहा जाता है। प्रतेयक वर्ष 39 दिनों के उपवास के बाद, 6 जनवरी को शाम के तारे के साथ यह पर्व सुरु होता है । इसका मुख्या आकर्षण 12 व्यंजनों का विशाल जलसा होता है ।  इसमें ज्यादातर मछली और बीटरूट सूप से बानी चीज़े होती है। यहाँ विशेष तोर पर बानी " कुक्ड ड्राई फ्रूट्स " ज्यादा प्रचलित है। यहाँ सांता को " बाबुषा" , यानि दादीमा कहते है ।


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 गौरव कुमार द्वारा लिखा गया लेख, आप उन्हें ट्विटर पर @gauravkumarleo पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकते है