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मिलिए कृतिका पुरोहित से: भारत की पहली नेत्रहीन डॉक्टर

alarm_on 2017-01-10 13:44:19
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वो तीसरी क्लास में थी जब ऑप्टिकल नर्व डैमेज होने के कारण उनकी आँखों की रौशनी छीन गयी. आप और हम शायद ऐसे हालत में अपनी हिम्मत खो बैठते, लेकिन इन्होने अपना हौसला बनाये रखा और आज कृतिका पुरोहित भारत देश की पहली नेत्रहीन डॉक्टर है.


रास्ते की रूकावटे

कृतिका का सफ़र आसान नहीं था. राष्ट्रीय नेत्रहीन संघ की छात्रा कृतिका को अपनी विकलांगता के कारण कई परेशानियों का सामना करना पड़ा. लेकिन उन्होंने अपने सपनो के साथ कोई समझौता नहीं करने का फैसला किया. कोर्ट में प्रैक्टिकल करके दिखाना और प्रवेश परीक्षा में जवाब लिखने के लिए दुसरे की मदद ये सब छोटी परेशानियाँ थी.

 

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पहला झटका

कृतिका के सामने पहली दिक्कत आई जब 17 साल की उम्र में उन्हें महाराष्ट्र प्रवेश परीक्षा में नेत्रहीन होने के कारण नहीं बैठने दिया गया. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और फैसला उनके पक्ष में आया. लेकिन मुश्किल अभी ख़त्म नहीं हुई थी, उन्हें नेत्रहीन होने के कारण एडमिशन देने से मना कर दिया ये कारण देकर की कोर्स में किये जाने वाले प्रैक्टिकल करने में वे समर्थ नहीं होंगी.

एक बार फिर कृतिका कोर्ट पहुंची और कोर्ट में ही प्रैक्टिकल कर दिखाया, जो अपने आप में इतिहास है. एक नमूना विशेष अदालत में लाया गया था और अपनी योग्यता सत्यापित करने के लिए कृतिका ने कोर्ट में ही शरीर रचना विज्ञान सत्र प्रदर्शित किया.
 

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संघर्ष की सफलता
कोर्स के दौरान सही प्रशिक्षण और मार्गदर्शन के बलबूते कृतिका ने खुद को काबिल बनाया. उन्होंने अपनी परीक्षा दी और शरीर रचना विज्ञान प्रैक्टिकल में सर्वाधिक अंक हासिल किये. कृतिका को ऑक्यूपेशनल थेरेपी और फिजियोथेरेपी के लिए महाराष्ट्र राज्य परिषद से प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ है, वो देश में पहली बार सरकार द्वारा प्रमाणित नेत्रहीन डॉक्टर है।


कृतिका का सफ़र इस बात की प्रेरणा है की अगर आप ठान ले तो आपको सफलता प्राप्त करने से कोई नहीं रोक सकता.

 

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